हरित तारा (पवित्र मुक्तिदायिनी)
अवलोकितेश्वर बोधिसत्व के करुणा के आँसुओं का अवतार। इक्कीस ताराओं में प्रमुख, आठ भयों से मुक्ति और शीघ्र संवेदनशीलता।
बुद्ध बोधिसत्व के मूल कारण और सम्मान-नाम
कहा जाता है कि अवलोकितेश्वर बोधिसत्व ने अनगिनत प्राणियों के दुःख देखकर आँसू बहाए, जो कमल में बदल गए और उनसे हरित तारा प्रकट हुईं। उनका दाहिना पैर कमल के आसन से बाहर है, जो प्राणियों की मुक्ति के लिए हर समय उठने की तत्परता का प्रतीक है।
महा करुणा की शक्ति और छह गतियों का उद्धार
अत्यंत शीघ्र प्रतिक्रिया! जल, अग्नि, सिंह, हाथी, आग, सर्प, चोर, और राजा के भय जैसे आठ भयानक संकटों से रक्षा करती हैं। उन्हें सबसे तीव्र मुक्ति देने वाली महिला आर्य के रूप में जाना जाता है।
पवित्र मंत्र और कर्म-शुद्धि की अनुभूति
हरित तारा मंत्र: ‘ॐ तारे तुत्तारे तुरे स्वाहा’ (Om Tare Tuttare Ture Svaha)। शीघ्र पूर्णता प्राप्त करती है और भय को दूर करती है।
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