अवलोकितेश्वर (Avalokiteshvara)
महान करुणा और दया वाले, दुःख और संकटों से उद्धार करने वाले बोधिसत्व

Avalokiteśvara

अवलोकितेश्वर (Avalokiteshvara)

दुःख की पुकार सुनकर उद्धार करते हैं, हजारों स्थानों पर प्रार्थना और हजारों स्थानों पर प्रतिक्रिया, शुद्ध कलश और विलो धारण करते हैं, बत्तीस प्रकटीकरण रूपों से अनगिनत प्राणियों का उद्धार करते हैं।

बौद्ध सूत्रों के प्रमाण और पूर्णता का मूल स्रोत

प्राचीन बुद्ध झेंगफ़ामिंग तथागत ने करुणा की नाव लौटाकर, महाकरुणा के प्रण-बल से बोधिसत्व रूप प्रकट किया, सहा और सुखावती लोकों में स्थायी रूप से निवास कर दुःखी प्राणियों का उद्धार करते हैं।

महाकरुणा के महान प्रण एवं दुःख-मोचन के पुण्य

उन्होंने चौरासी हजार धर्मद्वार खोले, चार आर्य सत्य और आर्य अष्टांग मार्ग सिखाया, प्राणियों को संसार में 'अनित्यता, दुःख, शून्यता, अनात्म' का सत्य देखने और अंतिम मोक्ष (निर्वाण) की ओर ले जाने का मार्गदर्शन किया।

मूल मंत्र-चक्र और ध्यान-अवलोकन

ॐ मणि पद्मे हूँ

oṃ maṇi padme hūṃ

जप उच्चारण:ॐ मणि पद्मे हूँ

प्रतिदिन प्रातःकाल गहरी साँस लेकर षडक्षरी महामंत्र का जाप करें; कोमल करुणा को स्वयं से दूसरों तक विस्तारित करें, तो उग्र और हिंसक चुंबकीय क्षेत्र स्वतः शांत हो जाएगा।

अपनी बुद्ध मार्ग की डिजिटल पुण्य-साधना प्रारंभ करें

प्रतिदिन अच्छे कर्मों की चेक-इन, इलेक्ट्रॉनिक मुयु पर मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से पुण्य अंक अर्जित करें, और स्वयं की बुद्ध-प्रकृति के जागरण का साक्षी बनें।