महास्थामप्राप्त बोधिसत्व (Mahasthamaprapta)
महान वीर्य, ज्ञान और दिव्य शक्ति संपन्न बोधिसत्व

महास्थामप्राप्त बोधिसत्व (Mahasthamaprapta)

सिर पर रत्नकलश में ज्ञान का प्रकाश संचित है, पैर उठाते ही तीन सहस्र महासहस्र लोक कांप उठते हैं, बुद्ध-स्मरण के मन से स्वयं ही मन खुल जाता है, और समाधि में प्रवेश करते हैं।

बौद्ध सूत्रों के प्रमाण और पूर्णता का मूल स्रोत

पश्चिम के तीन पवित्रों में से एक, अपने विशिष्ट ज्ञान के प्रकाश से सब कुछ प्रकाशित करते हैं, सभी प्राणियों को तीन दुर्गति मार्गों के दुःख से मुक्त कराते हैं, और अनुत्तर शक्ति प्रदान करते हैं।

महाकरुणा के महान प्रण एवं दुःख-मोचन के पुण्य

साधना में बाधा डालने वाले सभी मारों और बुरे कर्मों को काटता है, साथ ही लोक में एक शक्तिशाली धन देवता (धन भंडार को बिना क्षति के रक्षा करने वाला) के रूप में पूजा जाता है।

मूल मंत्र-चक्र और ध्यान-अवलोकन

ॐ सं जं जं सः स्वाहा
oṃ saṃ jaṃ jaṃ saḥ svāhā
जप उच्चारण:ॐ सं त्सं त्सं स्वाहा

छहों इंद्रियों को वश में करें, शुद्ध स्मृति को निरंतर बनाए रखें, दैनिक जीवन में बिना आलस्य के उत्साहपूर्वक साधना करें, और बाह्य विषयों के वश में आकर विचलित न हों।

अपनी बुद्ध मार्ग की डिजिटल पुण्य-साधना प्रारंभ करें

प्रतिदिन अच्छे कर्मों की चेक-इन, इलेक्ट्रॉनिक मुयु पर मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से पुण्य अंक अर्जित करें, और स्वयं की बुद्ध-प्रकृति के जागरण का साक्षी बनें।