
Mañjuśrī
मंजुश्री बोधिसत्व (Manjushri)
स्वर्ण-सदृश देह, ज्ञान की प्रज्वलित खड़ग धारण किए, हाथ में नीलकमल सूत्रग्रंथ लिए, नीलरोम सिंह पर आरूढ़, समस्त अविद्या एवं क्लेशों को काटते हैं।
बौद्ध सूत्रों के प्रमाण और पूर्णता का मूल स्रोत
त्रि-काल के समस्त बुद्धों की जननी, सात बुद्धों की गुरु, प्राचीन बुद्ध नागवंशोत्तमराज तथागत की अवतार-लीला, अनास्रव यथार्थ प्रज्ञा-ज्ञान की समग्र धारिणी।
महाकरुणा के महान प्रण एवं दुःख-मोचन के पुण्य
जो भी प्राणी पूर्ण हृदय से विश्वास और आनंद के साथ उनके नाम का जाप करता है, मृत्यु के समय अमिताभ बुद्ध निश्चित रूप से पवित्र समाज के साथ प्रकट होंगे, उनका स्वागत करेंगे, और उन्हें शुद्ध भूमि में पुनर्जन्म देंगे, कभी पीछे नहीं हटेंगे।
मूल मंत्र-चक्र और ध्यान-अवलोकन
ॐ अ र प च न धीः
oṃ a ra pa ca na dhīḥ
जप उच्चारण:ॐ अ र प च न धी
महायान ग्रंथों का गहन अध्ययन करें, शब्दों के बिना ही वास्तविकता के सूक्ष्म सिद्धांत को समझें, और तीक्ष्ण तलवार से आत्म-दया, आत्म-ग्लानि तथा दुविधा को काट दें।
अपनी बुद्ध मार्ग की डिजिटल पुण्य-साधना प्रारंभ करें
प्रतिदिन अच्छे कर्मों की चेक-इन, इलेक्ट्रॉनिक मुयु पर मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से पुण्य अंक अर्जित करें, और स्वयं की बुद्ध-प्रकृति के जागरण का साक्षी बनें।