श्वेत तारा (White Tara)
आयु बढ़ाने और बाधाएँ दूर करने वाली पवित्र मातृ देवी

श्वेत तारा (White Tara)

शरद-चंद्र जैसी श्वेत देह; दोनों आँखों के अतिरिक्त भ्रूमध्य, दोनों हथेलियों और दोनों पैरों के तलुओं में मिलाकर कुल सात आँखें हैं, जो सभी पीड़ाओं को भेदती हैं और अमरत्व, दीर्घायु तथा ज्ञान प्रदान करती हैं।

बौद्ध सूत्रों के प्रमाण और पूर्णता का मूल स्रोत

अवलोकितेश्वर बोधिसत्व की बाईं आँख के आँसू से प्रकट हुईं; अमितायुस बुद्ध और उष्णीषविजया के साथ मिलकर इन्हें “दीर्घायु के तीन आराध्य” कहा जाता है।

महाकरुणा के महान प्रण एवं दुःख-मोचन के पुण्य

अत्यंत शीघ्र प्रतिक्रिया! जल, अग्नि, सिंह, हाथी, आग, सर्प, चोर, और राजा के भय जैसे आठ भयानक संकटों से रक्षा करती हैं। उन्हें सबसे तीव्र मुक्ति देने वाली महिला आर्य के रूप में जाना जाता है।

मूल मंत्र-चक्र और ध्यान-अवलोकन

ॐ तारे तुत्तारे तुरे मम आयुःपुण्यज्ञानपुष्टिं कुरु स्वाहा
oṃ tāre tuttāre ture mama āyuḥ-puṇya-jñāna-puṣṭiṃ kuru svāhā
जप उच्चारण:ॐ तारे तुत्तारे तुरे मम आयुः पुण्य ज्ञान पुष्टिं कुरु स्वाहा

सीधे बैठें, मन को निर्मल करें, सभी छोटे और दुर्बल प्राणियों पर करुणा करें, और कल्पना करें कि शुद्ध सफेद अमृत पूरे शरीर की नसों, नाड़ियों और अस्थि-मज्जा को धो रहा है।

अपनी बुद्ध मार्ग की डिजिटल पुण्य-साधना प्रारंभ करें

प्रतिदिन अच्छे कर्मों की चेक-इन, इलेक्ट्रॉनिक मुयु पर मंत्र जाप और ध्यान के माध्यम से पुण्य अंक अर्जित करें, और स्वयं की बुद्ध-प्रकृति के जागरण का साक्षी बनें।