
चन्द्र
चंद्र देव (भगवान चंद्र)
चाँदी का रथ, दस मृग, रत्न-सा निर्मल और बर्फ-सा स्वच्छ, हाथ में कमल और शीतल चंद्र-पात्र धारण करते हैं; सत्ताईस नक्षत्रों, चंद्रलोक की अप्सराओं और समस्त प्राणियों के मन-बुद्धि पर शासन करते हैं।
वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व
समुद्र मंथन के समय प्रकट हुआ निर्दोष अमृतमय पवित्र चंद्रमा, जो ब्रह्मांड की स्त्रैण पोषक शक्ति तथा पौधों और औषधियों की वृद्धि के सार का प्रतिनिधित्व करता है।
दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध
मनुष्यों की भावनाओं और मन को संतुलित करना, मन को शांत और इच्छाशक्ति को स्थिर करना, प्रचुर कल्पनाशीलता और अंतर्ज्ञान प्रदान करना; वैदिक ज्योतिष में चंद्र (Chandra) के अनुरूप।
पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना
ॐ सोमाय नमः
oṃ somāya namaḥ / oṃ candrāya namaḥ
जप उच्चारण:ॐ सोमाय नमः / ॐ चन्द्राय नमः
पूर्णिमा की रात में चित्तशुद्धि हेतु ध्यान करें, चंद्रप्रकाश से शुद्ध किए गए जल का पान करें, और बेचैनी तथा चिंता से ग्रस्त तंत्रिका तंत्र को शांत करें।
अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें
उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।