
कार्तिकेय देव (Lord Kartikeya / Murugan)
सुंदर युवा, पवित्र स्वर्ण भाला 'वेल' (Vel) धारण करते हुए, पंख फैलाए मोर पर सवार, तीनों लोकों की दानव सेना को भयभीत करने वाले, साहस और दृढ़ता के शिखर।
वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व
भगवान शिव के तीसरे नेत्र की शुद्ध तेजस्वी अग्नि से उत्पन्न, छह अप्सराओं द्वारा पालन-पोषण, देव सेना का नेतृत्व करते हुए राक्षसराज तारकासुर का वध किया।
दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध
सभी प्रतिस्पर्धी शत्रुओं को परास्त करना, शरीर और ऊर्जा को बढ़ाना, रक्त-संबंधियों के परस्पर संघर्ष की पुरानी शत्रुता को मिटाना, नवग्रहों में मंगल (Kuja/Mangal) के अनुरूप।
पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना
शरीर और आत्मबल को साधें, प्रतिस्पर्धा का सामना बिना डर के करें, उच्च योद्धा-धर्म और सच्चाई के साथ कर्म करें, तो स्वाभाविक रूप से हर कार्य में सफलता मिलेगी।
अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें
उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।