कृष्ण (भगवान कृष्ण)
महान ज्ञान और महान प्रेम का आठवाँ अवतार

कृष्ण

कृष्ण (भगवान कृष्ण)

गहरे नीले दिव्य स्वरूप, मोरपंख का मुकुट, बाँसुरी बजाकर समस्त प्राणियों को मोहित करने वाले, कुरुक्षेत्र में श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश देते हैं।

वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व

भगवान विष्णु के आठवें पूर्ण अवतार, सापेक्ष अच्छे-बुरे से परे परम व्यक्तित्व के पूर्ण स्वरूप, महान प्रेम और महान ज्ञान के संगम।

दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध

आसक्ति को तोड़ना, कर्म योग (Karma Yoga) का ज्ञान प्रदान करना, और सांसारिक दुःखों से परे महान आनंद की अवस्था देना।

पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना

ॐ क्लीं कृष्णाय नमः

oṃ klīṃ kṛṣṇāya namaḥ

जप उच्चारण:ॐ क्लीं कृष्णाय नमः

दैनिक कार्यों में परिणामों के प्रति आसक्ति त्यागकर, पूरे मन से अपना कर्तव्य निभाएँ और उसके फल को सर्वोच्च दिव्य विधान को समर्पित करें।

अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें

उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।