
सरस्वती
वाग्देवी (Goddess Saraswati)
हिम-सफ़ेद वस्त्रों में, पवित्र वीणा बजाती हुई, हाथों में शास्त्र और माला लिए, श्वेत हंस पर आरूढ़, ब्रह्मांड के समस्त सच्चे ज्ञान, वाणी और प्रेरणा की स्वामिनी।
वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व
ब्रह्मा के चित्त-नदी से प्रकट हुई, जो निर्मल एवं निर्दोष बुद्धि के मूल स्रोत तथा सृजनात्मक वाणी-प्रवाह (Vak) का प्रतीक है।
दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध
विद्वानों की परीक्षाओं में सफलता, प्रेरणा के स्फुरण, संगीत एवं वक्तृत्व प्रतिभा तथा निर्दोष ज्ञान की अधिष्ठात्री हैं; नवग्रहों में बुध (Budha) और गुरु (Guru) से संबद्ध हैं।
पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
oṃ aiṃ saraswatyai namaḥ
जप उच्चारण:ॐ ऐम सरस्वते नमः
उच्च ग्रंथों का अध्ययन करना, संगीत और एकाग्र ध्यान का अभ्यास करना, वाणी के कर्म को शुद्ध रखना और दुर्वचन न बोलना, जिससे विचार स्वतः तीव्र होते हैं और प्रज्ञा विकसित होती है।
अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें
उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।