शिव (भगवान शिव)
विनाश और योग के महागुरु

शिव

शिव (भगवान शिव)

माथे पर तीसरा नेत्र प्रकट करते हैं, जटाओं में चंद्रमा और गंगा धारण करते हैं, त्रिशूल धारण करते हैं, कैलाश पर्वत पर विराजमान हैं, और ब्रह्मांड के विनाश, पुनर्जन्म तथा परम मोक्ष के स्वामी हैं।

वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व

अकल्पनीय आदिम ज्योतिर्लिंग, समय और स्थान से परे आदियोगी, रूपांतरण की महाशक्ति के स्वामी।

दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध

भौतिक माया और अहं के आग्रह को नष्ट करना, पुरानी कर्म-संरचनाओं को विलीन करना, शुद्ध चेतना और महामोक्ष प्रदान करना, तथा नवग्रहों में सूर्य और शनि के मृत्यु-जीवन रहस्यों के अनुरूप।

पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना

ॐ नमः शिवाय

oṃ namaḥ śivāya

जप उच्चारण:ॐ नमः शिवाय

गहरे विशुद्ध चक्र और आज्ञा चक्र के साथ ध्यान में बैठकर, सभी अज्ञान और बिखरे विचारों को जला दें, नकारात्मक भावनाओं को शुद्ध चेतना जागृति में परिवर्तित करें।

अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें

उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।