यम धर्मराज देवता (Lord Yama)
कर्म-न्याय एवं अधोलोक के स्वामी

यम

यम धर्मराज देवता (Lord Yama)

श्याम महिष पर सवार, हाथ में आत्माओं को बांधने वाली दिव्य पाश धारण करने वाले, कर्म और पाप-पुण्य को अत्यंत सूक्ष्मता से न्याय करने वाले, यमलोक के सर्वाधिक न्यायप्रिय और कठोर न्यायाधीश हैं।

वैदिक उत्पत्ति और ब्रह्मांडीय देवत्व

सूर्य देव के पुत्र, मानव मृत्यु और पुनर्जन्म के प्रथम पथप्रदर्शक, जो अटल ब्रह्मांडीय वस्तुनिष्ठ कर्म-नियम का प्रतिनिधित्व करते हैं।

दिव्य कर्तव्य एवं नवग्रह देवताओं का सहसंबंध

जीवन-मृत्यु संतुलन का संचालन, कर्म-फल का निष्पादन, सत्य-प्रतिज्ञाओं की रक्षा, और स्वार्थी दुष्कर्मियों को कर्माग्नि में शुद्ध होने के लिए बाध्य करना।

पवित्र मंत्र एवं ध्यान प्रार्थना

ॐ यमाय नमः

oṃ yamāya namaḥ

जप उच्चारण:ॐ यमाय नमः

सदैव कर्म-फल के प्रति भय-भाव रखें, समय के प्रवाह और जीवन-मृत्यु के नियमों का सम्मान करें, उज्ज्वल और निष्कपट कर्म करें, तो मन स्वाभाविक रूप से शांत और निर्भय रहेगा।

अपनी वैदिक ज्योतिष जन्म कुंडली (Kundli) अनलॉक करें

उच्च-सटीक लाहिरी अयनांश गणना के माध्यम से अपने आत्मकारक (Atmakaraka), चंद्र नक्षत्र (Nakshatra) और विशिष्ट आत्मिक संरक्षक आशीर्वाद का निर्धारण करें।