
पिशाच: तंत्रिका-ग्रस्त · रात्रिचर अस्थि-भक्षी दुष्टात्मा
कब्रिस्तानों और जंगलों में भटकने वाला मांसभक्षी प्रेत, जो मनुष्य की चेतना में प्रवेश कर उन्माद, पागलपन और रक्त-पिपासा उत्पन्न करता है।
ऋग्वेद महाकाव्य और पौराणिक उत्पत्ति
यह कश्यप ऋषि की पत्नी क्रोधवशा की संतान है, और प्राचीन ग्रंथों में इसे तीनों लोकों में सबसे अपवित्र प्राणी माना गया है। यह इच्छानुसार रूप बदलकर अदृश्य हो सकता है और प्राणियों की ऊर्जा को चूस लेता है। यह प्राचीन भारतीय आयुर्वेदिक भूत-विद्या (Bhuta Vidya) का मुख्य अध्ययन विषय है।
दिव्य रूप, शक्तियाँ और भयानक अधिकार
लाल आँखें, नीली त्वचा, नीली नसें उभरी हुई, नाखून तलवार की तरह, सड़ी हुई लाश की दुर्गंध, अंधेरी रातों में बिना तारों के चलना पसंद करता है।
पूर्वजन्म के कर्म चिह्न और मानसिक छाया प्रक्षेपण
अवचेतन में अत्यधिक अवसाद, आत्म-विनाश की प्रवृत्ति, ऊर्जा की कमी और बाहरी नकारात्मक ऊर्जा के आकर्षण से संबंधित।
वैदिक साधना, प्रतिकार और पाप निवारण मार्गदर्शिका
【सूर्य प्रकाश】 सुबह सूर्य की ओर मुख करके सूर्य नमस्कार (Surya Namaskar) का अभ्यास करें, अगरबत्ती या सफेद ऋषि धूप जलाएं, और गणेश के बाधा-नाशक मंत्र का जाप करें।
अशुभ राक्षसों को रक्षकों में बदलें: आंतरिक अज्ञान की शक्ति को प्रकाशित करें
YuanYu वैदिक जन्म कुंडली और D60 कर्म कुंडली में अपने राहु-केतु के स्थान और अशुभ ग्रहों के पहलुओं की जांच करें, अज्ञान को ज्ञान से प्रकाशित करें।